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आज का विचार (on Vichar Mantra)

आज का विचार (Read on Vichar Mantra): (Subscribe by e-mail)

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आज का विचार

(नोट :  और अधिक प्रेरक विचार आप, 'आज के विचार के  नए पेज पर', यहाँ  पढ़ सकते हैं )

(अब आप  Hindi Thoughts पेज पर महान व्यक्तियों के अनमोल विचार पढ़ सकते हैं|)


"जिंदगी में खुश रहने के लिए बहुत ही कम चीजों की जरूरत होती है |"-अनाम

"जब दूसरों को बदलना नामुमकिन हो - तो आपको खुद को ही बदल लेना चाहिए |"-अनाम

"अधिकतर लोग दूसरों से कहीं ज्यादा सम्मान की उम्मीद करते हैं - जितना सम्मान वे खुद को देते हैं |"-अनाम

"कीमत जल्द ही भुला दी जाती है - गुणवत्ता हमेशा याद रहती है |"-अनाम

"कोई भी इंसान जन्म से बुद्धिमान नहीं होता - इंसान बुद्धिमान बनता है |"-अनाम

"जिस तरह आप अपने धन को संभालते हैं - अपने समय को भी ऐसे ही संभालिए |"-अनाम

"जो जरूरत के समय देता है - दोगुना देता है|"-अनाम

"कुछ भी नहीं करने से अनुभव हासिल नहीं होता |"-अनाम

"शिक्षा का सही मकसद जान नहीं है बल्कि ज्ञान का उपयोग करना है |"-अनाम

"जब आप उस काम को करते हैं जिससे आपको डर लगता है - डर गायब हो जाता है |"-अनाम

"जो आग, आप अपने दुश्मन के लिए सुलगाते हैं - वह उससे कहीं ज्यादा, आपको जलाती है |"-अनाम

"जीवन में सबसे अधिक आनंद उसी काम को करने में आता है जिसे लोग कहते हैं कि आप नहीं कर सकते |"-अनाम

"अपने सपनों को साकार करने का सबसे अच्छा तरीका है - नींद से जाग जाना |"-अनाम

"जिम्मेदारी स्वीकार करने का अर्थ चुनौती स्वीकार करना है |"-अनाम

"समझदार आदमी खुद से सवाल पूछता है - नासमझ दूसरों से |"-अनाम

"एक पत्थर की भी तकदीर संवर सकती है - शर्त ये है के सलीके से तराशा जाए |"-मंजूर नदीम

"दोनों इतराफ़ के लोग घायल हुए - पत्थरों की कहाँ थी कमी शहर में |"-शीन कॉफ़ निजाम

"हमारी नफरतों की आग में सब कुछ ना जल जाए - के इस बस्ती में हम दोनों को आइन्दा भी रहना है |"-मैराज फैजाबादी

"सारी दुनिया से रिश्ता जुडा देखना - एक दिन खुद को खुद से जुदा देखना |"-आर. डी. शर्मा 'तासीर'

"पत्थर हमारे सेहन में आए खुशी हुई - गम तो गया के लोग हमें जानते नहीं |"-फिरोज जफर

"डूबा हो जब अँधेरे में हम साये का मकान - अपने मकां में शमा जलाना गुनाह है |"-खुमार बाराबंकवी


"हवा समझ के ना टाल अपने दर की दस्तक को - निकल के देख कोई साहिबे तलब तो नहीं |"-युनस निशात

"जला है मेरा नशेमन मैं फिर बना लूँगा - चमन पै आंच ना आए मेरी दुआ ये है |"-हयात वारसी

"इतना सच बोल के होठों का तबस्सुम ना बुझे - रौशनी खत्म ना कर आगे अँधेरा होगा |"-निदा फाजली

"ठोकर किसी पत्थर से अगर खाई है मैंने - मंजिल का निशां भी उसी पत्थर से मिला है |"-बिस्मिल

"हम तो दरिया हैं कोई राह बना ही लेंगे - आप पत्थर हैं बता दो के किधर जाओगे |"-मुजफ्फर रजमी

"दिल ने बहोत कहा के अकेले सफर करो - मैं कारवाँ के साथ चला और भटक गया |"-कैसर जाफरी

"घर में बैठो तो जमाने की हवा भी ना लगे - इतना ऊँचा ना उठाना कभी दीवारों को |"-सागर आज्मी

"बात जो कीजै बहुत सोच समझकर कीजै - बात है बात बहुत दूर निकल जाती है |"-नूर तकी नूर

"कितनी दीवारें उठी हैं एक घर के दरम्यां - घर कहीं गुम हो गया दीवारो-दर के दरम्यां |"- मखमूर सईदी

"शगुफ्ता फूलों से होती है बाग की रौनक - इसी ख्याल से हंसना हंसाना होता है |"- डॉ. के. के. रिषी

"साँस लेने का अगर नाम है जीना साहिर - साँस लेने के भी अंदाज बदलते रहिए |"- साहिर होश्यारपुरी

"ऐक इक संगे सलामत से किया है तामीर - कैसे इस शहर को छोडूँ के मेरा घर है यहाँ |"- शहाब जाफरी

"जिस कसौटी पर हमें आप परखते हैं नदीम - क्या नतीजा हो अगर आप को परखा जाए |"- हक बनारसी

"एक लम्हा भी मुसर्रत का बहुत होता है - लोग जीने का सलीका ही कहाँ रखते हैं |"- सईद जमीर जाफरी

"डाल किश्ती यकीं के धारे पर - जा ही निकलेगा तू किनारे पर |"- डॉ. के. के. रिषी

"सब मौत के ऐहसास से यूँ सहमे हुए हैं - जैसे कोई वाकिफ नहीं जीने की अदा से |"- याद देहलवी

"अभी टहनी से जो पत्ता गिरा है - मुकम्मल दास्ताँ इक कह गया है |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'

"आग को होती नहीं अपने पराए की तमीज - बात ये भूल गए आग लगाने वाले |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'

"अस्ल दुश्मन भी तुम्हें मिल जाएगा - अपने अंदर झाँक कर तो देखिए |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'

"कसूर उस शख्स का भी था बहुत कुछ - किसी कारण जो कुछ बोला नहीं था |"- डॉ. के. के. रिषी

"डूबने से डरने वालों से कहो - तैरना भी आपके बस का नहीं |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'

"जजबाए शौक की ये भी तौहीन है - रास्ता पूछना फासला देखना |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'

"वो हर तकाजे को पूरा करेगा मौसम के - जो मौसमों के तकाजों से आशना होगा |"- आरफान परभनवी

"और कुछ भी देखने से पेशतर - सर से ऊँचा है जो पानी देखिए |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'

"उन्हीं का डर नहीं जाता है दिल से - वो ही जो हादसे होते नहीं हैं |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'

"कर्म ही करना है तुझको तो ये करम करदे - मेरे खुदा तू मेरी ख्वाहिशों को कम करदे |"- शाहद कबीर

"हम ना ईसा हैं ना मंसूर हैं लेकिन फिर भी - हक का इजहार सरेदार जरूरी होगा |"- जाहिदा जैदी

"लहूलुहान मेरे पाँव तो हुए लेकिन - खुशी है राह को काँटों से साफ़ मैंने किया |"- मसरूर आबदी


"जो मिला मुझसे हो गया मेरा - सब को ऐसा हुनर नहीं आता |"- हुमा परवीन

"जो तेरे पहलू में गुजरी जिंदगी अच्छी लगी - तेरा गम अच्छा लगा तेरी खुशी अच्छी लगी |"- साहिर शैवी

"बारहा आँधियों ने दस्तक दी - तेरी खुशबू नहीं गई घर से |"- जाजब कुरैशी

"खूबियाँ भी उसमें कुछ होंगी जरुर - क्यों किसी के ऐब ही देखा करूँ |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'

"कितनी मेहनत से बनाया है सजाया है इसे - दिल ये कहता है के ये घर भी बदलना होगा |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'

"मेरा ऐहसास खतावार है सच कहने का - मुझसे पहले मेरा ऐहसास मिटाया जाए |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'

"बस गई है मेरे ऐहसास में कुछ ऐसी महक - कोई खुशबू मैं लगाऊं तेरी खुशबू आए |
मैंने दिन रात खुदा से ये दुआ माँगी थी - कोई आहट ना हो दर पर मेरे और तू आए |"- बशीर बदर

"वक्त आने दे हम भी ऐ सैयाद - गुल तराशेंगे खार जारों से |"- साहिर होश्यारपुरी

"दुश्मनी एक पल में होती है - दोस्ती को जमाने लगते हैं |"- खुर्शीद अफसर

"जिंदगी के हर इक इम्तिहाँ के लिए - आदमी रह गया देवता गुम हुआ |"- दीपक कमर

"जिंदगी है झील गहरी और सतह आब पर - टूटता बनता बिखरता दायरा हर शख्स है |"- अहमद कमाल

"जिन्हें हमको जगाना चाहिए था - क़यामत है के वो खुद सो गए हैं |"- दिवाकर राही

"आदमी वो नहीं हालात बदल दें जिनको - आदमी वो हैं जो हालात बदल देते हैं |"- जिगर जालन्धरी

"ज़िंदा रहने की निकल आएगी कोई सूरत - अपनी आँखों में कोई ख्वाब सजा कर देखो |"- अंजना सुधीर

"सर झुकाना नहीं आता तो बढ़ो दार की सिमत - और बिकने का इरादा है तो बाजार भी है |"- मुजफ्फर वारसी

"वो जिंदगी का सफर हो के जंग का मैदान - मुहाज कोई भी हो हौसला जरूरी है |"- अदरीस ज्या

"है अगर अज्म तो खुद ढूँढ ले अपनी मंजिल - क्यों किसी गैर से मंजिल का पता मांगे है |"- सराजोद्दीन सराज

"जफ़र मजबूरियां होंगी वगरना वो जरुर आता - ये घर उसका ये दर उसका गली उसकी दयार उसका |"- जफ़र गोरखपुरी

"क्या जरूरी है के वो मुजरिम भी हों - जिनके हक में फैसले होते नहीं |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'

"पहले हमनें घर बना कर फासले पैदा किए - फिर उठा दीं और दीवारें घरों के दरम्यां |"- बशीर फारुकी

"अज्म ये जबत के आदाब कहाँ से सीखे - तुम तो हर रंग में लगते थे बिखरने वाले |"- अज्म बाह्जाद

"मंजिले मक़सूद पर पहुंचे वो ही - राह में जो ठोकरें खाते रहे |"- कवंर महिंद्र सिंह बेदी 'सहर'

"ये तो कोई मंसूर बताए तो बताए - सूली पे तड़पने में मजा है कि नहीं है |"- ऐहसान दानिश

" ये गलत कहा किसी ने कि तेरा पता नहीं है -तुझे ढूंढने की हद तक कोई ढूंढता नहीं है |"- अंजना सुधीर

"जितना अपनाओगे उतना ही निखर जाएगी, जिंदगी खवाब नहीं है कि बिखर जाऐगी |"- साहिर होश्यारपुरी



अब seeds for mind पर भी प्रेरक विचार पढ़िए|


4 टिप्‍पणियां:

  1. अपने से छोटे कद के इंसान से झुक कर प्रणाम करना चाहिये । प्रकाष कुमावत/टीना कुमावत

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