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"जिंदगी में खुश रहने के लिए बहुत ही कम चीजों की जरूरत होती है |"-अनाम
"जब दूसरों को बदलना नामुमकिन हो - तो आपको खुद को ही बदल लेना चाहिए |"-अनाम
"अधिकतर लोग दूसरों से कहीं ज्यादा सम्मान की उम्मीद करते हैं - जितना सम्मान वे खुद को देते हैं |"-अनाम
"कीमत जल्द ही भुला दी जाती है - गुणवत्ता हमेशा याद रहती है |"-अनाम
"कोई भी इंसान जन्म से बुद्धिमान नहीं होता - इंसान बुद्धिमान बनता है |"-अनाम
"जिस तरह आप अपने धन को संभालते हैं - अपने समय को भी ऐसे ही संभालिए |"-अनाम
"जो जरूरत के समय देता है - दोगुना देता है|"-अनाम
"कुछ भी नहीं करने से अनुभव हासिल नहीं होता |"-अनाम
"शिक्षा का सही मकसद जान नहीं है बल्कि ज्ञान का उपयोग करना है |"-अनाम
"जब आप उस काम को करते हैं जिससे आपको डर लगता है - डर गायब हो जाता है |"-अनाम
"जो आग, आप अपने दुश्मन के लिए सुलगाते हैं - वह उससे कहीं ज्यादा, आपको जलाती है |"-अनाम
"जीवन में सबसे अधिक आनंद उसी काम को करने में आता है जिसे लोग कहते हैं कि आप नहीं कर सकते |"-अनाम
"अपने सपनों को साकार करने का सबसे अच्छा तरीका है - नींद से जाग जाना |"-अनाम
"जिम्मेदारी स्वीकार करने का अर्थ चुनौती स्वीकार करना है |"-अनाम
"समझदार आदमी खुद से सवाल पूछता है - नासमझ दूसरों से |"-अनाम
"एक पत्थर की भी तकदीर संवर सकती है - शर्त ये है के सलीके से तराशा जाए |"-मंजूर नदीम
"दोनों इतराफ़ के लोग घायल हुए - पत्थरों की कहाँ थी कमी शहर में |"-शीन कॉफ़ निजाम
"हमारी नफरतों की आग में सब कुछ ना जल जाए - के इस बस्ती में हम दोनों को आइन्दा भी रहना है |"-मैराज फैजाबादी
"सारी दुनिया से रिश्ता जुडा देखना - एक दिन खुद को खुद से जुदा देखना |"-आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"पत्थर हमारे सेहन में आए खुशी हुई - गम तो गया के लोग हमें जानते नहीं |"-फिरोज जफर
"डूबा हो जब अँधेरे में हम साये का मकान - अपने मकां में शमा जलाना गुनाह है |"-खुमार बाराबंकवी
"हवा समझ के ना टाल अपने दर की दस्तक को - निकल के देख कोई साहिबे तलब तो नहीं |"-युनस निशात
"जला है मेरा नशेमन मैं फिर बना लूँगा - चमन पै आंच ना आए मेरी दुआ ये है |"-हयात वारसी
"इतना सच बोल के होठों का तबस्सुम ना बुझे - रौशनी खत्म ना कर आगे अँधेरा होगा |"-निदा फाजली
"ठोकर किसी पत्थर से अगर खाई है मैंने - मंजिल का निशां भी उसी पत्थर से मिला है |"-बिस्मिल
"हम तो दरिया हैं कोई राह बना ही लेंगे - आप पत्थर हैं बता दो के किधर जाओगे |"-मुजफ्फर रजमी
"दिल ने बहोत कहा के अकेले सफर करो - मैं कारवाँ के साथ चला और भटक गया |"-कैसर जाफरी
"घर में बैठो तो जमाने की हवा भी ना लगे - इतना ऊँचा ना उठाना कभी दीवारों को |"-सागर आज्मी
"बात जो कीजै बहुत सोच समझकर कीजै - बात है बात बहुत दूर निकल जाती है |"-नूर तकी नूर
"कितनी दीवारें उठी हैं एक घर के दरम्यां - घर कहीं गुम हो गया दीवारो-दर के दरम्यां |"- मखमूर सईदी
"शगुफ्ता फूलों से होती है बाग की रौनक - इसी ख्याल से हंसना हंसाना होता है |"- डॉ. के. के. रिषी
"साँस लेने का अगर नाम है जीना साहिर - साँस लेने के भी अंदाज बदलते रहिए |"- साहिर होश्यारपुरी
"ऐक इक संगे सलामत से किया है तामीर - कैसे इस शहर को छोडूँ के मेरा घर है यहाँ |"- शहाब जाफरी
"जिस कसौटी पर हमें आप परखते हैं नदीम - क्या नतीजा हो अगर आप को परखा जाए |"- हक बनारसी
"एक लम्हा भी मुसर्रत का बहुत होता है - लोग जीने का सलीका ही कहाँ रखते हैं |"- सईद जमीर जाफरी
"डाल किश्ती यकीं के धारे पर - जा ही निकलेगा तू किनारे पर |"- डॉ. के. के. रिषी
"सब मौत के ऐहसास से यूँ सहमे हुए हैं - जैसे कोई वाकिफ नहीं जीने की अदा से |"- याद देहलवी
"अभी टहनी से जो पत्ता गिरा है - मुकम्मल दास्ताँ इक कह गया है |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"आग को होती नहीं अपने पराए की तमीज - बात ये भूल गए आग लगाने वाले |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"अस्ल दुश्मन भी तुम्हें मिल जाएगा - अपने अंदर झाँक कर तो देखिए |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"कसूर उस शख्स का भी था बहुत कुछ - किसी कारण जो कुछ बोला नहीं था |"- डॉ. के. के. रिषी
"डूबने से डरने वालों से कहो - तैरना भी आपके बस का नहीं |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"जजबाए शौक की ये भी तौहीन है - रास्ता पूछना फासला देखना |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"वो हर तकाजे को पूरा करेगा मौसम के - जो मौसमों के तकाजों से आशना होगा |"- आरफान परभनवी
"और कुछ भी देखने से पेशतर - सर से ऊँचा है जो पानी देखिए |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"उन्हीं का डर नहीं जाता है दिल से - वो ही जो हादसे होते नहीं हैं |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"कर्म ही करना है तुझको तो ये करम करदे - मेरे खुदा तू मेरी ख्वाहिशों को कम करदे |"- शाहद कबीर
"हम ना ईसा हैं ना मंसूर हैं लेकिन फिर भी - हक का इजहार सरेदार जरूरी होगा |"- जाहिदा जैदी
"लहूलुहान मेरे पाँव तो हुए लेकिन - खुशी है राह को काँटों से साफ़ मैंने किया |"- मसरूर आबदी
"जो मिला मुझसे हो गया मेरा - सब को ऐसा हुनर नहीं आता |"- हुमा परवीन
"जो तेरे पहलू में गुजरी जिंदगी अच्छी लगी - तेरा गम अच्छा लगा तेरी खुशी अच्छी लगी |"- साहिर शैवी
"बारहा आँधियों ने दस्तक दी - तेरी खुशबू नहीं गई घर से |"- जाजब कुरैशी
"खूबियाँ भी उसमें कुछ होंगी जरुर - क्यों किसी के ऐब ही देखा करूँ |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"कितनी मेहनत से बनाया है सजाया है इसे - दिल ये कहता है के ये घर भी बदलना होगा |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"मेरा ऐहसास खतावार है सच कहने का - मुझसे पहले मेरा ऐहसास मिटाया जाए |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"बस गई है मेरे ऐहसास में कुछ ऐसी महक - कोई खुशबू मैं लगाऊं तेरी खुशबू आए |
मैंने दिन रात खुदा से ये दुआ माँगी थी - कोई आहट ना हो दर पर मेरे और तू आए |"- बशीर बदर
"वक्त आने दे हम भी ऐ सैयाद - गुल तराशेंगे खार जारों से |"- साहिर होश्यारपुरी
"दुश्मनी एक पल में होती है - दोस्ती को जमाने लगते हैं |"- खुर्शीद अफसर
"जिंदगी के हर इक इम्तिहाँ के लिए - आदमी रह गया देवता गुम हुआ |"- दीपक कमर
"जिंदगी है झील गहरी और सतह आब पर - टूटता बनता बिखरता दायरा हर शख्स है |"- अहमद कमाल
"जिन्हें हमको जगाना चाहिए था - क़यामत है के वो खुद सो गए हैं |"- दिवाकर राही
"आदमी वो नहीं हालात बदल दें जिनको - आदमी वो हैं जो हालात बदल देते हैं |"- जिगर जालन्धरी
"ज़िंदा रहने की निकल आएगी कोई सूरत - अपनी आँखों में कोई ख्वाब सजा कर देखो |"- अंजना सुधीर
"सर झुकाना नहीं आता तो बढ़ो दार की सिमत - और बिकने का इरादा है तो बाजार भी है |"- मुजफ्फर वारसी
"वो जिंदगी का सफर हो के जंग का मैदान - मुहाज कोई भी हो हौसला जरूरी है |"- अदरीस ज्या
"है अगर अज्म तो खुद ढूँढ ले अपनी मंजिल - क्यों किसी गैर से मंजिल का पता मांगे है |"- सराजोद्दीन सराज
"जफ़र मजबूरियां होंगी वगरना वो जरुर आता - ये घर उसका ये दर उसका गली उसकी दयार उसका |"- जफ़र गोरखपुरी
"क्या जरूरी है के वो मुजरिम भी हों - जिनके हक में फैसले होते नहीं |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"पहले हमनें घर बना कर फासले पैदा किए - फिर उठा दीं और दीवारें घरों के दरम्यां |"- बशीर फारुकी
"अज्म ये जबत के आदाब कहाँ से सीखे - तुम तो हर रंग में लगते थे बिखरने वाले |"- अज्म बाह्जाद
"मंजिले मक़सूद पर पहुंचे वो ही - राह में जो ठोकरें खाते रहे |"- कवंर महिंद्र सिंह बेदी 'सहर'
"ये तो कोई मंसूर बताए तो बताए - सूली पे तड़पने में मजा है कि नहीं है |"- ऐहसान दानिश
" ये गलत कहा किसी ने कि तेरा पता नहीं है -तुझे ढूंढने की हद तक कोई ढूंढता नहीं है |"- अंजना सुधीर
"जितना अपनाओगे उतना ही निखर जाएगी, जिंदगी खवाब नहीं है कि बिखर जाऐगी |"- साहिर होश्यारपुरी
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"जिंदगी में खुश रहने के लिए बहुत ही कम चीजों की जरूरत होती है |"-अनाम
"जब दूसरों को बदलना नामुमकिन हो - तो आपको खुद को ही बदल लेना चाहिए |"-अनाम
"अधिकतर लोग दूसरों से कहीं ज्यादा सम्मान की उम्मीद करते हैं - जितना सम्मान वे खुद को देते हैं |"-अनाम
"कीमत जल्द ही भुला दी जाती है - गुणवत्ता हमेशा याद रहती है |"-अनाम
"कोई भी इंसान जन्म से बुद्धिमान नहीं होता - इंसान बुद्धिमान बनता है |"-अनाम
"जिस तरह आप अपने धन को संभालते हैं - अपने समय को भी ऐसे ही संभालिए |"-अनाम
"जो जरूरत के समय देता है - दोगुना देता है|"-अनाम
"कुछ भी नहीं करने से अनुभव हासिल नहीं होता |"-अनाम
"शिक्षा का सही मकसद जान नहीं है बल्कि ज्ञान का उपयोग करना है |"-अनाम
"जब आप उस काम को करते हैं जिससे आपको डर लगता है - डर गायब हो जाता है |"-अनाम
"जो आग, आप अपने दुश्मन के लिए सुलगाते हैं - वह उससे कहीं ज्यादा, आपको जलाती है |"-अनाम
"जीवन में सबसे अधिक आनंद उसी काम को करने में आता है जिसे लोग कहते हैं कि आप नहीं कर सकते |"-अनाम
"अपने सपनों को साकार करने का सबसे अच्छा तरीका है - नींद से जाग जाना |"-अनाम
"जिम्मेदारी स्वीकार करने का अर्थ चुनौती स्वीकार करना है |"-अनाम
"समझदार आदमी खुद से सवाल पूछता है - नासमझ दूसरों से |"-अनाम
"एक पत्थर की भी तकदीर संवर सकती है - शर्त ये है के सलीके से तराशा जाए |"-मंजूर नदीम
"दोनों इतराफ़ के लोग घायल हुए - पत्थरों की कहाँ थी कमी शहर में |"-शीन कॉफ़ निजाम
"हमारी नफरतों की आग में सब कुछ ना जल जाए - के इस बस्ती में हम दोनों को आइन्दा भी रहना है |"-मैराज फैजाबादी
"सारी दुनिया से रिश्ता जुडा देखना - एक दिन खुद को खुद से जुदा देखना |"-आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"पत्थर हमारे सेहन में आए खुशी हुई - गम तो गया के लोग हमें जानते नहीं |"-फिरोज जफर
"डूबा हो जब अँधेरे में हम साये का मकान - अपने मकां में शमा जलाना गुनाह है |"-खुमार बाराबंकवी
"हवा समझ के ना टाल अपने दर की दस्तक को - निकल के देख कोई साहिबे तलब तो नहीं |"-युनस निशात
"जला है मेरा नशेमन मैं फिर बना लूँगा - चमन पै आंच ना आए मेरी दुआ ये है |"-हयात वारसी
"इतना सच बोल के होठों का तबस्सुम ना बुझे - रौशनी खत्म ना कर आगे अँधेरा होगा |"-निदा फाजली
"ठोकर किसी पत्थर से अगर खाई है मैंने - मंजिल का निशां भी उसी पत्थर से मिला है |"-बिस्मिल
"हम तो दरिया हैं कोई राह बना ही लेंगे - आप पत्थर हैं बता दो के किधर जाओगे |"-मुजफ्फर रजमी
"दिल ने बहोत कहा के अकेले सफर करो - मैं कारवाँ के साथ चला और भटक गया |"-कैसर जाफरी
"घर में बैठो तो जमाने की हवा भी ना लगे - इतना ऊँचा ना उठाना कभी दीवारों को |"-सागर आज्मी
"बात जो कीजै बहुत सोच समझकर कीजै - बात है बात बहुत दूर निकल जाती है |"-नूर तकी नूर
"कितनी दीवारें उठी हैं एक घर के दरम्यां - घर कहीं गुम हो गया दीवारो-दर के दरम्यां |"- मखमूर सईदी
"शगुफ्ता फूलों से होती है बाग की रौनक - इसी ख्याल से हंसना हंसाना होता है |"- डॉ. के. के. रिषी
"साँस लेने का अगर नाम है जीना साहिर - साँस लेने के भी अंदाज बदलते रहिए |"- साहिर होश्यारपुरी
"ऐक इक संगे सलामत से किया है तामीर - कैसे इस शहर को छोडूँ के मेरा घर है यहाँ |"- शहाब जाफरी
"जिस कसौटी पर हमें आप परखते हैं नदीम - क्या नतीजा हो अगर आप को परखा जाए |"- हक बनारसी
"एक लम्हा भी मुसर्रत का बहुत होता है - लोग जीने का सलीका ही कहाँ रखते हैं |"- सईद जमीर जाफरी
"डाल किश्ती यकीं के धारे पर - जा ही निकलेगा तू किनारे पर |"- डॉ. के. के. रिषी
"सब मौत के ऐहसास से यूँ सहमे हुए हैं - जैसे कोई वाकिफ नहीं जीने की अदा से |"- याद देहलवी
"अभी टहनी से जो पत्ता गिरा है - मुकम्मल दास्ताँ इक कह गया है |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"आग को होती नहीं अपने पराए की तमीज - बात ये भूल गए आग लगाने वाले |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"अस्ल दुश्मन भी तुम्हें मिल जाएगा - अपने अंदर झाँक कर तो देखिए |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"कसूर उस शख्स का भी था बहुत कुछ - किसी कारण जो कुछ बोला नहीं था |"- डॉ. के. के. रिषी
"डूबने से डरने वालों से कहो - तैरना भी आपके बस का नहीं |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"जजबाए शौक की ये भी तौहीन है - रास्ता पूछना फासला देखना |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"वो हर तकाजे को पूरा करेगा मौसम के - जो मौसमों के तकाजों से आशना होगा |"- आरफान परभनवी
"और कुछ भी देखने से पेशतर - सर से ऊँचा है जो पानी देखिए |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"उन्हीं का डर नहीं जाता है दिल से - वो ही जो हादसे होते नहीं हैं |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"कर्म ही करना है तुझको तो ये करम करदे - मेरे खुदा तू मेरी ख्वाहिशों को कम करदे |"- शाहद कबीर
"हम ना ईसा हैं ना मंसूर हैं लेकिन फिर भी - हक का इजहार सरेदार जरूरी होगा |"- जाहिदा जैदी
"लहूलुहान मेरे पाँव तो हुए लेकिन - खुशी है राह को काँटों से साफ़ मैंने किया |"- मसरूर आबदी
"जो मिला मुझसे हो गया मेरा - सब को ऐसा हुनर नहीं आता |"- हुमा परवीन
"जो तेरे पहलू में गुजरी जिंदगी अच्छी लगी - तेरा गम अच्छा लगा तेरी खुशी अच्छी लगी |"- साहिर शैवी
"बारहा आँधियों ने दस्तक दी - तेरी खुशबू नहीं गई घर से |"- जाजब कुरैशी
"खूबियाँ भी उसमें कुछ होंगी जरुर - क्यों किसी के ऐब ही देखा करूँ |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"कितनी मेहनत से बनाया है सजाया है इसे - दिल ये कहता है के ये घर भी बदलना होगा |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"मेरा ऐहसास खतावार है सच कहने का - मुझसे पहले मेरा ऐहसास मिटाया जाए |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"बस गई है मेरे ऐहसास में कुछ ऐसी महक - कोई खुशबू मैं लगाऊं तेरी खुशबू आए |
मैंने दिन रात खुदा से ये दुआ माँगी थी - कोई आहट ना हो दर पर मेरे और तू आए |"- बशीर बदर
"वक्त आने दे हम भी ऐ सैयाद - गुल तराशेंगे खार जारों से |"- साहिर होश्यारपुरी
"दुश्मनी एक पल में होती है - दोस्ती को जमाने लगते हैं |"- खुर्शीद अफसर
"जिंदगी के हर इक इम्तिहाँ के लिए - आदमी रह गया देवता गुम हुआ |"- दीपक कमर
"जिंदगी है झील गहरी और सतह आब पर - टूटता बनता बिखरता दायरा हर शख्स है |"- अहमद कमाल
"जिन्हें हमको जगाना चाहिए था - क़यामत है के वो खुद सो गए हैं |"- दिवाकर राही
"आदमी वो नहीं हालात बदल दें जिनको - आदमी वो हैं जो हालात बदल देते हैं |"- जिगर जालन्धरी
"ज़िंदा रहने की निकल आएगी कोई सूरत - अपनी आँखों में कोई ख्वाब सजा कर देखो |"- अंजना सुधीर
"सर झुकाना नहीं आता तो बढ़ो दार की सिमत - और बिकने का इरादा है तो बाजार भी है |"- मुजफ्फर वारसी
"वो जिंदगी का सफर हो के जंग का मैदान - मुहाज कोई भी हो हौसला जरूरी है |"- अदरीस ज्या
"है अगर अज्म तो खुद ढूँढ ले अपनी मंजिल - क्यों किसी गैर से मंजिल का पता मांगे है |"- सराजोद्दीन सराज
"जफ़र मजबूरियां होंगी वगरना वो जरुर आता - ये घर उसका ये दर उसका गली उसकी दयार उसका |"- जफ़र गोरखपुरी
"क्या जरूरी है के वो मुजरिम भी हों - जिनके हक में फैसले होते नहीं |"- आर. डी. शर्मा 'तासीर'
"पहले हमनें घर बना कर फासले पैदा किए - फिर उठा दीं और दीवारें घरों के दरम्यां |"- बशीर फारुकी
"अज्म ये जबत के आदाब कहाँ से सीखे - तुम तो हर रंग में लगते थे बिखरने वाले |"- अज्म बाह्जाद
"मंजिले मक़सूद पर पहुंचे वो ही - राह में जो ठोकरें खाते रहे |"- कवंर महिंद्र सिंह बेदी 'सहर'
"ये तो कोई मंसूर बताए तो बताए - सूली पे तड़पने में मजा है कि नहीं है |"- ऐहसान दानिश
" ये गलत कहा किसी ने कि तेरा पता नहीं है -तुझे ढूंढने की हद तक कोई ढूंढता नहीं है |"- अंजना सुधीर
"जितना अपनाओगे उतना ही निखर जाएगी, जिंदगी खवाब नहीं है कि बिखर जाऐगी |"- साहिर होश्यारपुरी
अपने से छोटे कद के इंसान से झुक कर प्रणाम करना चाहिये । प्रकाष कुमावत/टीना कुमावत
जवाब देंहटाएंbahut achchi post. thanks.
जवाब देंहटाएंvisit my blog
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धन्यवाद, रामचंद्र जी|
जवाब देंहटाएं
जवाब देंहटाएंMy family every time say that I am killing my time here at net, however I know I am getting familiarity every day by reading such good content. outlook sign in